धर्म : राजनीति का जरिया
कभी कभी मुझे ऐसा महसूस होता है की हिन्दुस्तान क्यों एक धर्म निरपेक्ष देश है।
कभी कभी मुझे ऐसा महसूस होता है की हिन्दुस्तान क्यों एक धर्म निरपेक्ष देश है।
क्या ये एक ऐसी चीज़ है जिससे आज के दिन हमें हमारे समाज को विकशित करने में रुकावट आ रही है ? गूगल चाचा ने बताया की पुरे विश्व में अनेक विकशित , विकाशील और पिछड़े देश है जिनका कोई तय धर्म नहीं है और वो भी धर्म निरपेक्ष है , जैसे कनाडा , अमेरिका नाइजीरिया और चीन।
क्या होती है ये धर्म निरपेक्षता ? क्या होती है इसकी अवधारणा ?
साधारण लहजे में समझे तो वो राष्ट्र जिसकी संविधान किसी भी खास धर्म के विचारो से नहीं प्रभावित होती और सभी धर्मो के अनुयायिओं को समानता से देखती है और समानता से अधिकार देती है , उसे हम धर्म निरपेक्ष राष्ट्र बुलाते है।
विज्ञान का छात्र होने के कारन मैं आज तक समझ नहीं पाया की धर्म क्या होती है और क्यों होती है ? शायद मुझे आज तक किसी ने बताया ही नहीं की मेरा धर्म क्या है? हिन्दू कौन होते है मुस्लिम कौन होते है ? काफी दिवाली - ईद मानाने के बाद मुझे ईमानदारी से पता चला की मैं हिन्दू हूँ और मेरा दोस्त इरफ़ान मुस्लिम । मुझे तो हमेशा लगता था की जैसा मैं हूँ वैसा ही वो भी है। दोनों को क्रिकेट से काफी प्रेम है। दोनों इंडिया को हमेशा जीतता देखना चाहते है। स्कूल के दिनों में मेरा प्रिय विषय मैथ्स था तो उसका इंग्लिश। जैसा मेरा घर था वैसा ही उसका भी , जैसी मेरी माँ थी वैसी ही उसकी अम्मी भी थी , जिन्हे मैं चाचीजान बुलाता था और वो हमेशा मुझे बेटा कह के ही पुकारती थी। उनके हाथ की ऑमलेट ब्रेड मुझे पसंद थी और मेरी माँ की बनायीं हुई गुजिया और निमकी इरफ़ान को। उम्र के इस अंतराल में पता ही नहीं चल पाया की हममे सब कुछ सामान होते हुए भी एक चीज़ है जो हमें दो अलग पंक्तियों में बिभाजित करती है , और वो है उसका खान होना और मेरा मिश्रा। यानी की धर्म।
पर तब तक शायद देर हो चुकी थी जब की मुझे मेरे दोस्ती से ऊपर धर्म का पाठ पढ़ाया जाता और खान और मिश्रा के अंतर को दिखाया जाता।
मैं बिहार से आता हूँ और वहां हमें किसी ने धर्म का अंतर नहीं बताया। शायद यही हमारे देश की महानता है।
पर जब आज मैं अपने नेताओ को धर्म की बात करते देखता हूँ तो ऐसा लगता है की क्या हमारा भारतवर्ष सही में महान है ?
बिहार के चुनाव के सन्धर्वः में देखे तो आज वहां हर नेता और हर पार्टी देश की इस महानता को खुलेआम शर्मशार कर रही है और हम जैसे मासूम लोग अपने नेताओ को अपना आदर्श मानकर उसे खुले मन से स्वीकृति भी दे रहे है।
किसी मुस्लिम का गौमांस खा लेना तो किसी हिन्दू का सुवर का मांस मस्जिद में फ़ेंक देना ही आज की राजनीती बन गयी है। कोई आज के दिन उस मांस की बात नहीं कर रहे जो दिन प्रतिदिन गलती जा रही। कोई उस मांस की बात नहीं करता जो मतदान के दिन उसी नेताओ को और बड़ा नेता बना देगी। कोई उस मांश के अंदर छिपी उस भूक की बात नहीं करता जो उसे प्रतिदिन कमजोर करते ही जा रही है।
हाँ भाई कोई करे भी तो क्यों ? हम भारतीय खासकर बिहारी इतने भावुक जो है , और इस बात को हमारे नेता बहोत खूबसूरती से समझते है और जानते है। वो जानते हैं की हमें थोड़ी सी भावुकता की टॉनिक वो देंगे जिससे की हमारा मस्तिस्क निष्क्रिय हो जायेगा और हम दो पंक्तियों में आसानी से बाँट जायेंगे।
बहोत दुखद है ये पर आप माने या न माने … यही सच्चाई भी है।
पर मुझे ये भी विस्वास है की ये राजनीती छणिक है और कल जरूर बदलेगी। शायर जायसी की दो पंक्तियाँ याद आती है की। ....
उम्मीद-ए-शिफा भी नहीं बीमार को तेरे
अल्लाह से मायूस हुआ भी नहीं जाता

Completely agree with your views!!! Politics need to change and only the people can bring that change by not succumbing to religion or cast based politics
ReplyDeleteSoch badlo desh badlo.. Usse pehle apne dimaag ka prayog karo.. Dikhao pe mat jao apni akal lagao.. Good going Abhishek keep growing...
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